Asaduddin Owaisi on BJP: “अगर मैं हैदराबाद, औरंगाबाद, किशनगंज और कुछ अन्य सीटों पर चुनाव लड़ता हूं और बीजेपी 240 सीटें जीतती है, तो क्या मैं इसके लिए जिम्मेदार हूं?”

Asaduddin Owaisi on BJP: “अगर मैं हैदराबाद, औरंगाबाद, किशनगंज और कुछ अन्य सीटों पर चुनाव लड़ता हूं और बीजेपी 240 सीटें जीतती है, तो क्या मैं इसके लिए जिम्मेदार हूं?”
Gold Smuggling Case: डिप्टी सीएम शिवकुमार ने परमेश्वर का बचाव करते हुए उन्हें “स्वच्छ और ईमानदार” व्यक्ति बताया और कहा कि वह एक कानून का पालन करने वाले नागरिक और बड़े नेता हैं।
Home Minister
Parameshwara: कर्नाटक के गृह मंत्री जी परमेश्वर के ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ED) की कार्रवाई के मामले में एक नया ट्विस्ट आ गया है। डिप्टी सीएम डीके शिवकुमार ने कहा कि उन्होंने एक्ट्रेस को शादी का तोहफा दिया था और इसमें कुछ भी गलत नहीं है। डिप्टी सीएम ने कहा कि मैंने गृह मंत्री से बात की, वहां पर एक शादी समारोह था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पुलवामा अटैक के नाम पर वोट मांगे थे। पीएम ने कहा था कि पुलवामा के शहीदों के नाम पर वोट करें।
टीएमसी के यशवंत सिन्हा कह रहे हैं बिहार इलेक्शन के लिए पहलगाम अटैक कराया गया
Randhir Jaiswal: रणधीर जायसवाल ने सिंधु जल संधि को निलंबित किए जाने पर कहा कि यह संधि तब तक स्थगित रहेगी जब तक पाकिस्तान आतंकवाद को बंद नहीं कर देता। खून और पानी एक साथ नहीं बह सकता।
Rajasthan News: राज्य सरकार ने 1994 बैच के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी आनंद श्रीवास्तव को पुलिस महानिदेशक (डीजी) के पद पर पदोन्नत करने के आदेश जारी किए हैं।
New Delhi:
हिंदी भाषा भारतीयों के लिए महत्त्वपूर्ण है। हिंदी भाषा को समझने के लिए हमें इसकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि की ओर देखना चाहिए। हिंदी का उद्भव संस्कृत से हुआ है और यह एक इंदो-आर्य भाषा है। हिंदी का महत्व भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के समय भी बढ़ा। गांधीजी और अन्य स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने हिंदी का प्रयोग बड़े पैमाने पर किया और इसका समर्थन किया।
हिंदी भाषा की उत्पत्ति का इतिहास भारत के सांस्कृतिक और भाषाई विकास का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। हिंदी भाषा भारतीय आर्य भाषाओं के अंतर्गत आती है और इसका विकास कई चरणों में हुआ है। हिंदी भाषा की जड़ें संस्कृत में मिलती हैं, जो भारत की सबसे प्राचीन और पवित्र भाषा मानी जाती है। संस्कृत, विशेष रूप से वैदिक संस्कृत, वैदिक काल (1500 ई.पू. – 500 ई.पू.) से साहित्यिक और धार्मिक ग्रंथों की भाषा रही है।
भारतीय भाषाओं के विकास का आधार संस्कृत भाषा ही है और हिंदी भी इससे प्रभावित रही है। संस्कृत से कई प्राचीन भारतीय भाषाएं विकसित हुईं, जिन्हें प्राकृत कहते हैं। प्राकृत से अपभ्रंश भाषाओं का विकास हुआ, जो प्राचीन और मध्यकालीन भारतीय भाषाओं के बीच की कड़ी मानी जाती हैं। 7वीं से 10वीं शताब्दी के बीच अपभ्रंश का प्रचलन था। अपभ्रंश भाषाएँ वे रूप थीं, जो धीरे-धीरे स्थानीय बोलियों में बदल गईं और आधुनिक भारतीय भाषाओं का आधार बनीं। खड़ी बोली, ब्रजभाषा और अवधी जैसी हिंदी की कई बोलियाँ अपभ्रंश से निकलीं।
1000 ई. से 1500 ई. तक के समय को आदिकाल कहा जाता है। उस समय साहित्य भी विकसित नहीं हुआ था। अपने विकास की शुरुआत में 1000 से 1100 ई तक हिंदी अपने अपभ्रंश के निकट ही थी। समय के साथ परिवर्तन हुआ और 1500 ई. आते-आते हिंदी भाषा अपने स्वतंत्र रूप में खड़ी हो चुकी थी। 1500 ई. के समय दोहा, चौपाई, छप्पय, दोहा, गाथा आदि छंदों की रचनाएं होना शुरू हो गई थी। मध्यकाल की अवधि 1500 से 1800 ई. तक थी। इस समय हिंदी भाषा में बहुत परिवर्तन अधिक परिवर्तन हुए थे।
फारसी के लगभग 3500 शब्द, अरबी के लगभग 2500 शब्द, पश्तों भाषा के लगभग, 50 शब्द और तुर्की भाषा के 125 शब्द हिंदी की शब्दावली में जुड़ गए थे। उसे समय यूरोप के देशों के साथ व्यापार संपर्क भी बढ़ रहा था। इस वजह से पुर्तगाली, स्पेनी, फ्रांसीसी और अंग्रेजी शब्दों के कई शब्द हिंदी भाषा में शामिल हुए। 1800 ई से लेकर वर्तमान तक का समय आधुनिक काल के रूप में जाना जाता है। हिंदी भाषा के आधुनिक काल में देश में अधिक परिवर्तन हुए हैं। उसे समय अंग्रेजी भाषा का प्रभाव देश की भाषा और संस्कृति पर पढ़ने लगा था। अंग्रेजी शब्दों को हिंदी भाषा के शब्दों के साथ प्रयोग किया जाने लगा था। आधुनिक काल के चार प्रमुख उपकाल हैं तथा इन उपकालों में कई कवियों और साहित्यकारों ने हिंदी भाषा को समृद्ध किया।
हिंदी भाषा का साहित्य चार प्रमुख कालों में बंटा हुआ है। ये काल क्रमश: आदिकाल, भक्तिकाल, रितिकल और आधुनिक काल हैं। आदिकाल को वीरगाथा काल भी कहा जाता है। आदिकाल समय का साहित्य वीरता और शौर्य की कहानियों पर आधारित था। भक्ति काल को हिंदी साहित्य का स्वर्णिम युग कहा जाता है। भक्ति काल में भक्ति आंदोलन को शुरू किया गया था और धार्मिक साहित्यों की रचना इस काल में की गई थी। इस काल के प्रमुख कवि कबीर दास और गुरु नानक जी माने जाते हैं। रीतिकाल के समय में श्रृंगार रस और नायिका भेद को अत्यधिक प्रधानता थी। रीतिकाल के कवियों ने नायिका भेद प्रेम सौंदर्य जैसे विषयों पर अपनी रचनाएं की थी।
आधुनिक काल के चार प्रमुख उपकाल भारतेंदु युग, द्विवेदी युग, छायावाद और प्रगतिवाद है। भारतेंदु युग प्रमुख कवि और नाटककार भारतेंदु हरिश्चंद्र की वजह से जाना जाता है। भारतेंदु हरिश्चंद्र ने हिंदी में राष्ट्र प्रेम और समाज सुधार के विचारों को प्रस्तुत किया था इसी युग में हिंदी गद्य साहित्य का भी विकास हुआ था। द्विवेदी युग के प्रमुख लेखक महावीर प्रसाद द्विवेदी थे। महावीर प्रसाद द्विवेदी ने साहित्य में नैतिकता और सुधारवादी दृष्टिकोण के बारे में लिखा था। छायावाद युग में प्रकृति, प्रेम और रहस्यवाद अपने चरम पर था। छायावाद के प्रमुख कवियों की बात करें तो इनमें जयशंकर प्रसाद, सुमित्रानंदन पंत, सूर्यकांत त्रिपाठी निराला और महादेवी वर्मा को गिना जाता है। प्रगतिवाद का साहित्य समाजवादी विचारधारा से बहुत अधिक प्रभावित था। प्रतिवाद में मुख्य रूप से सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन ‘अज्ञेय’, नागार्जुन, मुक्तिबोध, और त्रिलोचन मशहूर हुए।
हम सभी को हिंदी भाषा के महत्व को समझने और समर्थन करने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए। हिंदी भारत के साथ दुनिया के अन्य कई देशों में भी बोली जाती है। हमें इसके साहित्य, संगीत, कला, और विभिन्न धार्मिक तथा सांस्कृतिक अधिकार को समझने और प्रसारित करने का प्रयास करना चाहिए। भारतीयों को हिंदी भाषा को प्रमोट करके हमारे देश की एकता को मजबूती देने का काम करना चाहिए, ताकि हम सभी भारतीय एक होकर आगे बढ़ सकें।
Appearing before a summer vacation Bench of Justices G.R. Swaminathan and V. Lakshminarayanan, senior counsel P. Wilson, representing the Tamil Nadu Higher Education Department, said the transfer petition had been filed in view of connected cases pending before the top court.
Higher Education Secretary C. Samayamoorthy also filed a memo before the High Court, contending that the PIL petition was politically motivated as it had been filed by Kutty, alias K. Venkatachalapathy, who was a Bharatiya Janata Party (BJP) office-bearer in Tirunelveli district.
Andriy Portnov was previously a senior aide to removed former President Viktor Yanukovych and had been the subject of US sanctions.
A Ukrainian former politician has been shot dead by unknown assailants outside a school in Madrid, Spain, authorities said.
The man was identified by Spain’s Ministry of Interior as Andriy Portnov, who was previously a senior aide to Ukraine’s former President Viktor Yanukovych
The attack on Wednesday morning took place outside the gates of the American School in the Spanish capital’s upscale neighbourhood of Pozuelo de Alarcon.
Police were called at about 9:15am (07:15 GMT) and notified that a man had been shot in the street.
Witnesses quoted by the police said he was shot “several times” in the head and body by more than one assailant. The attack occured as Portnov prepared to get into a vehicle, a police source told the AFP news agency, adding that the assailants then fled on foot to a wooded area.
One student at the school, Timur Ayaokur, told the news agency that he and his classmates first heard there had been a shooting about 20 minutes into their first class of the day.
I thought it was a drill,” said the 17-year-old.
His mother, Elina Ayaokur, told the agency that she knew the victim, although not well.
“I didn’t know there were Ukrainian politicians there,” she said, adding that the victim had a son in the 4th grade.
7 अक्तूबर 2023 के हमास के हमलों के बाद इसराइल ने उसके ख़िलाफ़ ऑपरेशन शुरू किया था. इसके लिए उसके पास हथियारों का एक बड़ा ज़खीरा था. इनमें से कई हथियार अमेरिका ने दिए थे और बाक़ी हथियारों के लिए उसने इसराइल को फंडिंग दी थी.
इसराइल के अन्य यूरोपीय सहयोगी भी उसके इस संकट की घड़ी में साथ खड़े थे.
इसराइल के प्रति उनकी गहरी संवेदना और एकजुटता थी, जो 7 अक्तूबर के हमले में 1200 लोगों की मौत के बाद पैदा हुई थी. इस हमले में मारे गए ज़्यादातर लोग इसराइली थे. इसके अलावा 251 लोगों को हमास ने बंधक भी बना लिया था और उन्हें ग़ज़ा में घसीटे जाने की तस्वीरों ने भी इसराइल के प्रति अंतरराष्ट्रीय जगत की हमदर्दी पैदा की थी.
लेकिन ऐसा लगता है कि अब इसराइल के प्रति यह हमदर्दी ख़त्म होती जा रही है. कम से कम फ़्रांस, ब्रिटेन और कनाडा के संबंध में ऐसा कहा जा सकता है.